My Poetry
Wednesday, April 1, 2020
अंगीठी
जल कर उस अंगीठी ने देखो याद छोड़ा है,
सफर में उस मोहब्बत ने क्या क्या याद छोड़ा है,
उनके नाजुक लवो पे अब, गैरों के नाम रहते है,
उस गुमनाम मोहब्बत खुद को गुमनाम छोड़ा है,
अमित कुमार सिंह
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment