डगमगाती लौह ने कुछ कहा है तुम्हारे लिए ,
बहकती हवाओ ने सुनाया है तुम्हारे लिए ,
कोरे कागज पर कयास तो सब लगाते
लडख़ड़ाते हाथो ने कुछ लिखा है तुम्हारे लिए ,
इस दिल को कहा कुछ पता है
जान हम जिन्दा है तुम्हारे लिए ,
खता तो बस इतनी ही है इस दिल की ,
ये धड़कता है बस तुम्हारे लिए ,
अमित कुमार सिंह
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