Wednesday, April 15, 2020

धरम पत्नि

किसी माईने मे मैं तुम्हारा हूँ  सब जानते है 
तुम्हारे जिद के आगे सब पिछड़ जाते है
तुम्हारी  खट्टी मीठी बातों ऐसे फिसले 
अब तो दिन मे भी तारे नज़र आते हैं 
  अमित कुमार सिंह 

Monday, April 13, 2020

तुम्हारे लिए ,


डगमगाती  लौह ने कुछ कहा है तुम्हारे लिए ,
बहकती हवाओ ने सुनाया है तुम्हारे लिए ,
कोरे कागज पर कयास तो सब लगाते 
लडख़ड़ाते हाथो ने कुछ लिखा है तुम्हारे लिए ,

इस दिल को कहा कुछ पता है 
जान  हम जिन्दा है तुम्हारे लिए ,
खता तो बस इतनी ही है इस दिल की ,
ये धड़कता है बस तुम्हारे लिए ,
अमित कुमार सिंह 

Saturday, April 4, 2020

अंधेरे रूठ जाते है

माचिस की आखिरी तीली..........रिवेश ...

उनका नाम लेते ही सब, पीछे छूट जाते है 
अपनी मासूमियत में वो पत्थर दिल नज़र आते है,
सोचता हु की थोड़ी रोशनी डालू उनके नाम पर,
चिराग जलाते ही अंधेरे रूठ जाते है l l 
अमित कुमार सिंह 

Wednesday, April 1, 2020

अंगीठी







जल कर उस अंगीठी ने देखो याद छोड़ा है,
सफर में उस मोहब्बत ने क्या क्या याद छोड़ा है,
उनके नाजुक लवो पे अब, गैरों के नाम रहते है,
उस गुमनाम मोहब्बत खुद को गुमनाम छोड़ा है,

अमित कुमार सिंह