Saturday, October 12, 2019

चश्मे वाली



यही पर पहली बार उनसे मुलाकात हुआ 
उनकी चुलबुली बातों  मे क्या बवाल हुआ 
बात हुई नजरें मिली इकरार हुआ 
उनकी जूठी चाय पर इज़हार हुआ 
अजी उस चश्मे  वाली से मुझे प्यार हुआ ll 

उनके हसी ठहाके का मैं भी भागीदार हुआ 
मिलने पर हाथ मिलाने का शिलशिला भी हुआ 
एक दूसरे से लिखित वो संवाद हुआ 
स्टेशन पर मिलने का भी करार हुआ 
उस चश्मे वाली से मुझे प्यार हुआ ll 

बात करते हुए तुम्हारा छत पर आना भी हुआ 
बैठे हुए लोगों का इशारा भी हुआ 
हवाओं के बहकावे में श्यामल आसमा भी साफ हुआ 
मेरे चाँद को देख वो चाँद भी जलकर के कई बार राख हुआ  
उस चश्मे वाली से मुझे प्यार हुआ ll 

बात बस दो की थी शोर मोहल्ला में हुआ 
उधारी थोड़ी से थी नीलाम पूरा घर हुआ 
आते जाते लोगो के मज़ाक का हिस्सेदार हुआ 
उस चश्मे वाली से मुझे प्यार हुआ ll