बड़ी मशक्क़त की थी उसने ,
मुझे निर्दोष साबित करने की ,
वो भी मोहब्ब्बत का हारा था ,
नहीं ली कोई रकम मेरे वकालत करने की ,
आरोप था मुझ पर, प्यार अधूरा करने का,
किस पैमाने से नाप कर न्यायधीश ने सज़ा सुनाई होगी l l
क्या सोचकर आज वो आज मेंहदी लगाई होगी l l
किसी और से बात करते देख आशंका की सुई घुमाई होगी ,
सहेलियों के बहकावे में आकर वो अनुमान लगाई होगी ,
मेरा मांझी किसी और नाव की तैयारी में है क्या,
शायद यही सोचकर आज वो मेंहदी लगाई होगी l l
अमित कुमार सिंह
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