किन बातों से अब भी तुम परेशान हो,
क्या बेबसी है क्यूँ हैरान हो,
इतनी नफ़रत तुम्हें मुझसे क्यूँ है,
भूल जाओ सब कुछ, अब तुम आज़ाद हो ll
जो चाहती थी बहाना , तुम उसमे कामयाब हो,
कैसे करू मैं नफ़रत ,बेवजह बेवक्त की बेबसी हो,
कुछ उठाई थी जिम्मेदारियाँ मुस्कुराहट के कारोबार की ,
भूल जाओ सब कुछ उन जिम्मेदारियाँ सेअब तुम आज़ाद हो ll
जो चाहती थी बहाना , तुम उसमे कामयाब हो,
कैसे करू मैं नफ़रत ,बेवजह बेवक्त की बेबसी हो,
कुछ उठाई थी जिम्मेदारियाँ मुस्कुराहट के कारोबार की ,
भूल जाओ सब कुछ उन जिम्मेदारियाँ सेअब तुम आज़ाद हो ll
अमित कुमार सिंह
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