Sunday, November 3, 2019

एक  बार शहर से मुड़ गये तो फिर क्या पलटना
जो उड़ गये कबूतर तो फिर घर क्या लौटना
आज वो मुझे लख कर सामने से निकल गये
अब लव खामोश हैं  तो आवाज क्या करना



हम दोनों का चर्चा अब सरेआम हो गया
मैं घर से निकला और मुहल्ला पहरेदार हो गया
मेरी बर्बादी का आलम कुछ ऐसा चला
उन अनजान गलियों में भी बदनाम हो गया

गलती किसी और की थी इल्ज़ाम किसी और पर डाला
वो चिठ्ठी मेरी थी नाम किसी और का डाला
मोहब्बत को जताने बदनामी का था बवाल
मोहब्बत किसी और से थी नाम किसी और का उछाला


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