मोह ने मोह को पंछियों के शोर को, अनसुना कर गया ये जमाना,
अपने मतलब के आगोश में, आगे बढ़ता चला गया ये जमाना,
घर तो बहुत बने पत्थरों आशियाने के लिए ,
छतो पर दाना-पानी रखना भूल गया ये जमाना l l
अमित कुमार सिंह
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